हवा चली योगेंद्र

 हवा चली योगेंद्र
By: No Source Posted On: October 04, 2019 View: 192

हवा चली योगेंद्र

हवा चली

अभी यहाँ, अभी वहाँ रुकी कहाँ, गयी कहाँ

नगर-नगर, गली-गली हवा चली! हवा चली !!

इसे उठा, उसे पटक यहाँ अटक, वहाँ मटक

इसे सटक, उसे गटक कभी कहीं गयी भटक

मचा अजीब खलबली हवा चली! हवा चली !!

पहाड़ को बुहारती बहार को सँवारती

गुबार को पुकारती बुखार को उतारती

हुई उड़नछू मनचली हवा चली! हवा चली !!

कभी खड़ी, कभी पड़ी, कभी रही, कभी अड़ी

मचान, छान, झोपड़ी धमाल, धमा-चौकड़ी

कहीं बुरी, कही भली, हवा चली! हवा चली !!

अगर कहीं गई बिफर हिला दिए किले, शिखर

महल हुए तितर-बितर कभी इधर, कभी उधर

निडर चपल उतावली हवा चली! हवा चली !!

                               योगेंद्र

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