चेतक श्यामनारायण पाण्डेय

चेतक    श्यामनारायण पाण्डेय
By: No Source Posted On: August 27, 2019 View: 667

चेतक श्यामनारायण पाण्डेय

चेतक

रण बीच चौकड़ी भर भरकर, चेतक बन गया निराला था |

राणा प्रताप के घोड़े से, पड़ गया हवा का पाला था ||

गिरता न कभी चेतक तन पर, राणा प्रताप का कोड़ा था |

वह दौड़ रहा अरि मस्तक पर, यह आसमान का घोडा था ||

जो तनिक हवा से बाग़ हिली, लेकर सवार उड़ जाता था |

राणा कि पुतली फिरि नही, तब तक चेतक मुड़ जाता था ||

कौशल दिखलाया चालो में, उड़ गया भयानक भालो में |

निर्भीक गया वह ढालो में, सरपट दौड़ा करवालो में ||

है यहीं रहा अब यहाँ नहीं, वह वही रहा, है वहां नही|

थी जगह न कोई जहाँ नही, किस अरि मस्तक पर कहाँ नही||

बढते नद-सा वह लहर गया, वह गया, गया फिर ठहर गया ||

भला गिर गया गिरा निषंग, हय टापों से खन गया अंग |

बैरी समाज रह गया दंग, घोड़े का ऐसा देख रंग |

    श्यामनारायण पाण्डेय

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