वीर, तुम बढ़े चलो द्वारिका प्रसाद महेश्वरी

वीर, तुम बढ़े चलो   द्वारिका प्रसाद महेश्वरी
By: No Source Posted On: August 27, 2019 View: 307

वीर, तुम बढ़े चलो द्वारिका प्रसाद महेश्वरी

वीर, तुम बढ़े चलो

वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो,

हाथ में ध्वजा रहे, बाल दल सजा रहे |

ध्वज कभी झुके नही, दल कभी रुके नही |

 

वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो,

सामने पहाड़ हो, सिंह कि दहाड़ हो |

तुम निडर हटो नही, तुम निडर डटो वही |

 

वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो,

 मेघ गरजते रहे, मेघ बरसते रहे |

बिजलियाँ कड़क उठे, बिजलियाँ तड़क उठे |

 

वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो,

 प्रात हो कि रात हो, संग हो न साथ हो |

सूर्य से बढ़े चलो, चंद्र से बढ़े चलो|

वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो,                                द्वारिका प्रसाद महेश्वरी

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