धन - प्राप्ति का मूल मंत्र

धन - प्राप्ति का मूल मंत्र
By: No Source Posted On: June 05, 2019 View: 339

धन - प्राप्ति का मूल मंत्र

धन - प्राप्ति का मूल मंत्र

एक बार की बात है एक राजा अपने प्रजा की प्रत्येक शुख सुबिधा का बहुत ध्यान रखते थे | यही कारण है की वे अपनी प्रजा का सुख दुख जानने के लिए प्राय: नगर मे भ्रमण किया करते थे | उसी समय की बात है एक बार रात को राजा भेष बदल कर प्रजा का हाल चाल जानने के लिए  घूमने निकले | एक स्थान से उन्हे घने जंगल से गुजराना पड़ा और वे रास्ता भूल गए | रास्ते की तलाश करते हुये लगभग आधी रात को वे एक गाव  मे पाहुचे | गाँव में पाहुचते ही उन्हे एक झोपड़ी दिखाई पड़ी | उन्होने झोपड़ी के दरवाजे पर दस्तक दी | वह झोपड़ी एक किसान की थी जिसका नाम केशव था | उस झोपड़ी में वह अपनी पत्नी के साथ रहता था | दस्तक सुन कर उसने दरवाजा खोला और राजा से पूछा "तुम कौन हो और क्या चाहते हो ?"

राजा ने कहा - मै एक अजनबी हूँ | राह भटक गया हूँ | रात बिताने के लिए जगह चाहता हूँ

केशव ने राजा को झोपड़ी के अन्दर बुला लिया | रात मे ही उनकी पत्नि ने राजा के लिए भोजन बनाया |

केशव ने राजा के सामने भोजन परोसा और कहा - भोजन करो यात्री !

भोजन साधारण था , परन्तु  बड़ा स्वादिस्त था | उस पर राजा को जोरों की भूख लगी थी | उन्होने पेट भर कर खाना खाया |

सुबह जब राजा वहाँ से चलने लगे तो उन्होने केशव को अपनी अँगूठी देते हुए कहा , तुम दिल्ली आना और मुझसे मिलना | मेरा नाम अकबर है |

दो वर्ष के बाद उस गाँव मे भयंकर सूखा पड़ा | चारे के बिना केशव का बैल भी मर गया और  उसके पास दूसरा बैल खरीदने के लिए रुपये नही थे

जब केशव की पत्नी केशव को याद दिलाई | उसने सोचा -  देखने में वह अमीर आदमी लगता था | शायद माँगने पर वह बैल खरीदने लायक रुपये दे दे |

कई दिन पैदल चलकर केशव दिल्ली पहुँचा | दिल्ली में उसने अँगूठी दिखाकर  कई लोगो से अकबर का पता पूछा | लोग देखे राजा की अँगूठी एक भीखमाँगे जैसे आदमी के पास देखकर सिपाहियो ने उसे चोर समझ कर पकड़ लिया | अगले ही दिन उसे दरबार मे राजा के

सामने हाजिर किया गया |

राजा उसे देखते ही पहचान लिया | उन्होने ने उसे मुक्त कराया और पूछा- कहो मित्र ! कैसे हो ?

केशव भोला भाला किसान था | उसे इतना तक नही मालूम था कि राजा क्या होता है ? उसने उदास होकर कहा "गाँव मे सूखा पड़ गया" | चारे के बिना मेरा बैल मर गया |

हालाँकि  किसी से कुछ मांगना गलत बात है , पर तुम मेरे मित्र हो |तुम से सहायता मांगने मे कोई पाप नही है |

 राजा उसके भोले पन पर हँस पड़े | उन्हों ने उसे अतिथि गृह मे ठहरा दिया | किसान ने बड़िया खाना खाया और सो गया |सुबह एक आवाज के साथ उसकी आँखें खुली | उसने खिड़की से झाँककर देखा तो राजा एक छत पर खड़े होकर जोर जोर से किसी को पुकार रहे थे |

वह कभी आसमान की ओर हाथ उठाकर फैलाते तो कभी घुटनो के बल बैठकर सिर को झुका लेते | केशव को यह देख कर बड़ा आश्चर्य हुआ | वह समझ नही पाया की राजा क्या कर रहे है ? कुछ देर बाद वह दरबार मे पहुँचा तो राजा ने उससे कहा दोस्त तुम जो चाहोगे मई तुम्हें दे सकता हूँ | तुम एक दो दिन यहा रूको | दिल्ली घूम लो जब जाने का मन करे तो कहना ! मई तुम्हें घोड़ा गाड़ी पर तुम्हें भिजवा दूँगा | केशव ने हाँ मे सिर हिला दिया |

फिर कुछ सोच का बोला - परंतु यह बताओ की सुबह तुम छत पर क्या कर रहे थे ? राजा उसके भोले पन पर मुस्कुरा पड़े

उन्होने कहा - मै भगवान को याद कर रहा था | उससे शक्ति , धन और उम्र माँग रहा था | उससे दुआ माँग रहा था की वह मुझे अच्छा आदमी बनाए |

केशव कुछ देर खड़ा सोचता रहा , फिर बोला - मै तो यह सोच कर चला आया था कि तुम एक अमीर आदमी हो और मेरी सहायता के लिए धन देने पर तुम्हें कोई कमी नही होगी | पर तुम तो स्वंय भिखमंगे हो | तुम मुझे क्या दे सकते हो ? माफ कर देना दोस्त ! मै अपनी मेहनत को भूल कर तुम्हारे पास माँगने चला आया |

मै भीख के धन से बैल नही ख़रीदूँगा | मै भगवान से माँगूँगा तो केवल यह कि वह मुझे मेहनती बनाए | उसकी यह बात सुनकर राजा स्तब्ध रह गए | उस अनपढ़ किसान ने उन्हे बता दिया था

कि परिश्रम सब प्रकार के धनों कि प्राप्ति का मूल मंत्र है |

Tags:
#अकबर की कहानी  # मजेदार कहानी   # राजा की कहानी   # 

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