रेल / श्यामनारायण पाण्डेय

रेल / श्यामनारायण पाण्डेय
By: No Source Posted On: October 19, 2019 View: 562

रेल / श्यामनारायण पाण्डेय

रेल / श्यामनारायण पाण्डेय

आग पानी का अनूठा मेल हूँ चाल मेरी जिंदगी, मै रेल हूँ |

देखने पर दिखती फौलाद मै किंतु हूँ इनसान कि औलाद मै |

भाप मेरी माँ, पिता विज्ञानं है लाडला इंग्लैंड जन्म स्थान है |

प्रकृति कि पाबंदियो को तोड़ने आदमी को आदमी से जोड़ने

नापती हूँ मै समय कि दूरियाँ देख मुझको कापती मजबूरियाँ |

धड़धड़ाकर मै निकलती हूँ जिधर थरथराती भय से फौलादी डगर |

दर्शको के वास्ते मै खेल हूँ चाल मेरी जिंदगी, मै रेल हूँ |

मै उठाकर यात्रियों को गोद में बेतहाशा दौड़ती हूँ मोद में,

फिर पूलों पर रेंगती हूँ झूमकर, देश का दर्शन कराती घूमकर|

लक्ष्य तक जन-जन को पहुचती हूँ मै, मारती हूँ सीटियाँ गाती हूँ मै

मौज मस्ती से भरा हर काम है, जिंदगी जिन्दादिली का नाम है |

शौक मेरा, देश कि सेवा करू, माल ढोऊँ, दुःख मरीजो के हरू |

राह कि कठिनाईयों को तोड़ दूँ, दो दिशाओ को मिला दूँ, जोड़ दूँ |

सवारी हूँ, माल हूँ, या मेल हूँ| चाल मेरी जिंदगी मै रेल हूँ |

                                                                                  श्यामनारायण पाण्डेय

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#syaamnarayan pandey poem poetry kids 

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