तुलसी विवाह विधि और मुहूर्त सन 2019 नवम्बर,धार्मिक महत्व , औषधीय गुण

तुलसी विवाह विधि और मुहूर्त सन 2019 नवम्बर,धार्मिक महत्व , औषधीय गुण
By: No Source Posted On: October 31, 2019 View: 165

तुलसी विवाह विधि और मुहूर्त सन 2019 नवम्बर,धार्मिक महत्व , औषधीय गुण

तुलसी विवाह विधि और मुहूर्त सन 2019 नवम्बर

ओब्सेर्व –हिन्दू

प्रकार –धार्मिक

उत्सव –एक दिन का

शुरू –प्रबोधिनी एकादशी {8 नवम्बर से 9 नवम्बर 2019 को है }

समाप्त –कार्तिक पूर्णिमा {12 नवम्बर 2019}

आवृति –वार्षिक

तुलसी  विवाह  तारीख एवं मुहूर्त–

शनिवार ,9 नवम्बर 2019 सुबह 8 बजकर 7 मिनट से 9 बजकर 25 मिनट तक

द्वादसी तिथि प्रारंभ -12 बजकर 24 मिनट्स से दोपहर (8 नवम्बर 2019 से)

द्वादसी तिथि अंत –दोपहर 2 बजकर 40 मिनट तक (9 नवम्बर 2019)

 

तुलसी माता का मंत्र – महा  प्रसाद जननी ,सर्व सौभाग्यावार्धिनी आधी ब्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते |

तुलसी विवाह कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष में एकादशी के दिन किया जाता है| इसे देवउठनी एकादशी या प्रबोधनी एकादशी या देवोत्थान एकादशी भी कहा जाता है| यह एक श्रेष्ठ मांगलिक और अध्यात्मिक पर्व है| तुलसी विवाह बहुत ही धूमधाम से गाजे–बाजो के साथ किया जाता है| तुलसी विवाह से मिलता है| कन्यादान के बराबर फल है| मान्यता है की तुलसी विवाह कई जन्मो के पापो को नष्ट करता है| इस दिन व्रत रखने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है |

तुलसी  विवाह पूजा विधि ;

1.तुलसी विवाह के दिन सबसे पहले सूर्योदय से उठकर सबसे पहले स्नान करे साफ या नया कपडा पहने और पूजा एवं व्रत का संकल्प  करे |

2.शुभ मुहूर्त में पौधे के ऊपर मंडप बनाये गन्ने को चारो तरफ गाड कर और उसको फूल माला से सुसजित करे |

3.तुलसी माता को लाल रंग बहुत पसंद है| विवाह के दिन उनको लाल रंग का चुनरी ओढ़ाये|

4.अगर तुलसी विवाह शाम को करनी हो तो| तुलसी के पौधे को सूर्यास्त के पहले ही अपने आंगन में या छत पर रख ले.

5.पूजा से पहले तुलसी माता के पास गमले में शालिग्राम जी का आवाहन करके शालिग्राम को गमले में स्थापित  कर दे .

6.विवाह का सारा सामग्री एक थाली में रख ले जैसे – गंगा जल, सिंदूर, फूल, अक्षत, वस्त्र,  अबीर, गुलाल, कुमकुम, हल्दी, चन्दन, सुहाग का सामान मिठाई, फल,दिया, घी, धूपबती, और अन्य पूजा की सामग्री |

7.तुलसी के पौधे पर श्रृंगार की पूरी वस्तु चढ़ाये उनको दुल्हन के तरीके से खूब सजाये | फिर खूब गीत मंगल गाते गाते शालिग्राम जी को तुलसी माता के साथ स्थापित करे |

8.सबसे पहले भगवान शालिग्राम जी की पूजा करे| शालिग्राम जी पर गंगा जल छिडके, हल्दी , चन्दन, लगाये पिला वस्त्र पहनाये कलावा बांधे अबीर ,गुलाल और फूल चढ़ाये इसके बाद शालिग्राम जी को मिठाई फल नवैध और अन्य चीजे चढ़ाये |

9.इसके बाद तुलसी माता की पूजा करे |

10.दीप जलाये धुप बाती जलाये मिठाई ,फल का भोग लगाये |

11.फिर कपूर जलाए आरती करे | और 11 बार तुलसी जी की परिक्रमा करे |

12.तुलसी माता को सिंदूर लगाए बिंदी लगाये और अपनी सुहाग के लिए उनसे प्रार्थना करे |

13.तुलसी माता पर चढ़ाया गया सामान किसी पंडित को या किसी सुहागिन को दान करे| थोडा सुहाग का सामान अपने लिए रख ले.

तुलसी विवाह व्रत कथा-

1.पौराणिक कथा के अनुसार राक्षस कुल में एक अत्यंत ही सुन्दर कन्या का जन्म हुआ| जिसका नाम वृंदा रखा गया| वृंदा बचपन से ही भगवान विष्णु की पूजा करती थी और उनकी बहुत बड़ी भक्त थी| वह कन्या जैसे ही बड़ी हुई उसका विवाह एक असुर जालंधर नामक राक्षस से हो गयी| जलंधर नामक राक्षस ने चारो तरफ बड़ा उत्पात मचा रखा था| वह बड़ा वीर था पराक्रमी था| उसकी वीरता का रहस्य उसकी पत्नी वृंदा का पतिव्रता धर्म| उसी के प्रभाव से वह विजयी बना हुआ था| जलंधर तो युद्ध में चला गया और वृंदा व्रत का संकल्प लेकर पूजा में बैठ गयी| उसके व्रत के प्रभाव से देवता भी जलंधर को न हरा सके सारे देवता जब हारने लगे तो विष्णु जी के पास पहुचे और सभी ने भगवान से प्रार्थना की| भगवान् बोले ,वृंदा मेरी परम भक्त है, मै उससे छल नही  कर सकता| इस देवता बोले की भगवान् दूसरा कोई हो तो बताये, लेकिन हमारी मदद जरुर करे| इस पर भगवान् विष्णु ने जलंधर का रूप धरा और वृंदा के महल में पहुच गए| और वृंदा का पतिव्रता धर्म भंग करने का निश्चय किया| उन्होंने जब जलंधर का रूप धर छल से स्पर्श किया| वृंदा का पति जलंधर देवताओ से युद्ध में परास्त हो गया और मारा गया जैसी ही वृंदा सतीत्व भंग हुआ ,जलंधर का सिर उसके आंगन में आ गिरा| जब वृंदा ने यह देखा तो क्रोधित होकर जानना चाहा की जिसने उसको स्पर्श किया वह कौन है| सामने साक्षात् विष्णु जी खड़े थे उसने भगवान् विष्णु को  श्राप दे दिया| जिस प्रकार तुमने छल से मुझे पति वियोग दिया है उसी प्रकार तुम्हारी पत्नी का भी छल पूर्वक हरण होगा और स्त्री वियोग सहने के लिए तुम भीं मृत्यु लोक में जन्म लोगे यह कह कर वृंदा अपनी पति के साथ सती हो गयी| वृंदा के श्राप से ही श्री राम ने अयोध्या में जन्म लिया और उन्हें सीता वियोग सहना पड़ा.

2. एक अन्य कथा में आरम्भ यथावथ है , लेकिन इस कथा में वृंदा ने विष्णु जी को यह शाप दिया दिया था कि तुमने मेरा सतीत्व भंग किया है अतः तुम पत्थर के बनोगे | यह पत्थर शालिग्राम कहलाया विष्णु ने कहा हे वृंदा| मै तुम्हारे सातित्य का आदर करता हूँ, इसके बाद वे अपने पति का सिर ले कर सती हो गयी उनकी राख से एक पौधा निकला तब भगवान बिष्णु जी ने उस पौधे का नाम तुलसी रखा और कहा की मैं इस पत्थर रूप में ही रहूँगा, जिसे शालिग्राम के नाम से तुलसी जी के साथ पूजा जायेगा इतना ही नहीं कहा की किसी भी शुभ कार्य में बिना तुलसी जी के भोग के पहले कुछ भी स्वीकार नही करूँगा| तभी से ही तुलसी जी की पूजा होने लगी| कार्तिक मॉस में तुलसी जी का विवाह शालिग्राम जी के साथ किया जाता है| साथ ही देव उठानी एकादसी के दिन इसे तुलसी विवाह के रूप में मनाया जाता है.

तुलसी माता की आरती :-

तुलसी महरानी नमो- नमो ,

हरी की पटरानी नमो-नमो ||

धन तुलसी पूरण तप  कीनो ,         

शालिग्राम बनी पटरानी ||

जाके पत्र मंजरी कोमल ,

श्रीपति कमल चरण लपटानी ||

धुप दीप नैवेध आरती ,

पुष्पन की वर्षा बरसानी ||

छपन भोग छातिशो व्यंजन ,

बिन तुलसी हरी एक न मानी ||

सभी सखी मैया तेरो यश गावें ,

भक्तिदान दीजो महारानी |

नमो –नमो तुलसी महारानी ,

तुलसी महारानी नमो –नमो ||

तुलसी महारानी नमो –नमो ,

हरी की पटरानी नमो –नमो |

तुलसी के पौधे का धार्मिक महत्व- 

तुलसी के पौधे का धार्मिक महत्त्व भी बहुत अधिक है तुलसी भगवान विष्णु को अत्यधिक प्रिय है| इसलिए तुलसी के पत्ते से भगवान् विष्णु की पूजा करने पर अत्यधिक लाभ प्राप्त होता है| मुख्य रूप से एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते से भगवान् विष्णु की पूजा की जाती है| लेकिन भगवान् गणेश की पूजा में तुलसी का बिलकुल भी प्रयोग नहीं किया जाता| तुलसी की पत्तियों को कुछ खास दिनों नहीं तोड़नी चाहिए. रविवार, एकादसी, चंद्रग्रहण, को तुलसी का पत्ता नहीं तोड़नी चाहिए .सूर्यास्त के बाद भी तुलसी की पत्तियां नहीं तोड़नी ऐसा करना अशुभ माना जाता है| घर में तुलसी का पौधा होना शुभ होता है. इसके सामने रोज दिया जलाने से घर में सुख समृधि आती है| मान्यता है की तुलसी होने से घर से नकरात्मक उर्जा दूर रहती है |

तुलसी के पौधे के औषधीय गुण-

1.रोज तुलसी पत्ते को खाने से सेहत के लिए अच्छा होता है. तुलसी में बीमारियों से लड़ने के गुण होते है. यह शरीर में बीमारियों से लड़ने की क्षमता प्रदान करती है |

2.तुलसी के पत्तियों से खून साफ़ रहता है. इससे बाल और त्वचा स्वस्थ रहते है.

3.तुलसी की पत्तियों का ग्रीन टी बहुत फायदे मंद है.

4.तुलसी की पत्तियों का चाय बहुत स्वादिस्ट और लाभ दायक होता है सर्दी जुखाम में.

5.तुलसी के पत्ते शरीर में उर्जा बढ़ने का काम भी करता है.

6.तुलसी के पत्ते पुराणी से पुराणी बुखार को सही करता है.

7.तुलसी पत्ता कैंसर जैसी बीमारी को सही करता है और कैंसर होने नही देता है |

जय हो तुलसी माता |

Tags:
#tulsi vivah story tulsi vivah 2018 tulsi vivah 2019 tulsi vivah katha tulsi vivah geet tulsi vivah 2019 date tulsi vivah song tulsi vivah serial Tulsi Vivah  # Tulsi Vivah 2018  # Tulsi Shaadi  # Shaligram  # Tulsi shaligram vivah  # Tulsi shaligram Vivah katha  # Tulsi Ki Shaadi  # Dev Uthani  # Devuthani Ekadashi  # Dev Uthani Ekadashi  # तुलसी विवाह  # तुलसी विवाह 2018  # तुलसी की शादी" 

  Contact Us
 Poem Poetry for Kids

Uttar Pradesh (India}


Mail : tyaginiraj87@gmail.com
Business Hours : 9:30 - 5:30

  Follow Us
Site Map
Get Site Map
UA-151118390-1